…पर क्या तुम समझती हो ?

केह तो देता हु की मैं ठीक हु
ना चाह के हँस भी देता हु
बस यही सोच के तुझे दुःख ना हो ।

पर क्या तुम समझती हो ?

 

जब लौट के हर रात मैं घर को वापस आता हु
थका हारा होने के बावजूद तेरी बस एक हँसी के लिए
बात करता जाता हु ।

पर क्या तुम समझती हो ?

 

आज तक माँ को एक तोहफा नहीं दिया
पर तुम्हारी एक मांग पर
हर जरुरत पूरा करता हु ।

पर क्या तुम समझती हो ?

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